Sunday, February 23, 2020

NIOS Free Solved Assignments (2019 - 2020): SOCIAL SCIENCE 2013 HINDI MEDIUM


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1.(a) मनुष्य की प्रगति में शहरी जिन्दगी के किन्हीं दो लक्षणों की परख कीजिए। 
उत्तर:- मनुष्य की प्रगति में शहरी जिन्दगी के दो लक्षण निम्नलिखित है:- 
(i) शिकारी युग:- ऐसी कई घटनाओं को हमारे पुरानी चीजों को ढूंढने वालों को मिली जिससे हम अपने पूर्व जीवन के बारे में जान सकें। इस प्रकार के जिंदगी को हम पूर्व आदम कहते हैं क्योंकि हमेशा जिंदगी में मनुष्य वातावरण पर निर्भर रहता था। मनीषियों ने अपने जीने के लिए जानवरों, पक्षियों, मछली जीवन का शिकार कर जीवन यापन करते थे। वाह शिकारियों की तरह कई वर्ष तक रहे। यह शाखा पत्थर यू कही गई थी यही वह समय था जब पशु पालने शुरू हुआ था। 
(ii) गांव का जीवन:- खेती बाड़ी की वजह से मनुष्य एक जगह रुक और रहने लगे। इन्होंने  सीख लिया था कि किस तरह चीजों को जमीन में बो कर फसल उगाई जा सकती है। इस तकनीक से वह एक जगह पर रुककर फसल उगाने लगे। अब उनके पास रहने के लिए एक पक्की जगह हो गई थी जिसने आगे चलकर एक गांव की शक्ल ले ली जहां से था सभ्यता सही मायने में जन्म लिया। इसको हम देहाती काल भी कह सकते हैं। 

2.(a) हिमालय तथा प्रायद्वीपीय जल प्रवाह प्रणाली में अंतर स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर:- हिमालय तथा प्रायद्वीपीय जल प्रवाह प्रणाली में अंतर निम्नलिखित है:- 
हिमालय जल प्रवाह प्रणाली 
(i) हिमालय नदियां अधिकांश बारहमासी हैं। इनमें वर्ष भर पानी होता है। 
(ii) यह नदियां अधिकांशत: हिमनद और बर्फ चोटियों से उत्पन्न होती हैं। 
(iii) हिमालय जल प्रवाह प्रणाली यह वर्षा से भी पानी प्राप्त करते हैं इस श्रेणी में मुख्य नदियां इस प्रकार है, सिंधु नदी प्रणाली, गंगा नदी प्रणाली, ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली ।
प्रायद्वीपीय जल प्रवाह 
(i)प्रायद्वीपीय जल प्रवाह प्रणाली अधिकतर प्रायद्वीप पूर्व की ओर बढ़ते हुई बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करती हैं। 
(ii) केवल नर्मदा और ताप्ती नदियां पश्चिम की ओर परवाह करती हैं। यह पनबिजली पैदा करने के लिए उपयुक्त है क्योंकि यह नदियां जलपात एवं क्षिप्रिका बनाती हैं। 
(iii) प्रायद्वीपीय की मुख्य नदियां हैं। महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी । 

3.(a) भारत में चुनाव प्रक्रिया में सुधार लाने हेतु कोई दो उपाय सुझाइए। 
उत्तर:- भारत में चुनाव प्रक्रिया में सुधार लाने हेतु 2 उपाय निम्नलिखित हैं:- 
(i) वोट, सीट असंतुलन को काम करने के लिए प्रचलित बहुलवादी व्यवस्था के स्थान पर किसी एक से आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था को लागू करना।
(ii) "राजनीति दल पारदर्शी तथा लोकतांत्रिक तरीके से कार्य करें" यह सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली को नियमित करना। 

4.(a) हड़प्पा निवासियों के धर्म और संस्कृति की परख कीजिए। 
उत्तर:- हड़प्पा निवासियों के धर्म और संस्कृति की परख:- मातृदेवियां हड़प्पावासियों के बीच बेहद लोकप्रिय प्रतीत होती हैं। मातृदेवियां की मिट्टी की बनी मूर्तियां मिली हैं। मोहेंजो- दड़ों में एक पुरुष-देवता भी मिला है, जिसे शिव का आदी रूप कहां गया है। उसे एक मुहर पर पशुओं से जीरे योग की मुद्रा में बैठे दिखाया गया है। लिंग पूजा, वृक्ष और जड़ात्मवाद भी प्रचलन में थे। विभिन्न स्थलों पर मिले ताबिल और जंतर आत्माओं तथा पर उनके विश्वास की ओर इशारा करते हैं। हड़प्पा-वासियों ने उच्च स्तरीय तकनीकी की चीजें हासिल की थी। उन्हें नागर-अभियांत्रिकी, चिकित्सा मापतोल और स्वच्छता की जानकारी थी। हुए भी जानते थे। वे एक लिपि का प्रयोग करते थे, जिसे अभी तक नहीं समझा जा सका है।

5(b) क्षेत्रवाद के किन्ही दो गुणों को उजागर कीजिए। उत्तर:- क्षेत्रवाद के दो गुण निम्नलिखित हैं:- 
(i) क्षेत्रीयवाद राष्ट्रीय समाकलन के मार्ग में एक अन्य बाधा है।कई अवसरों पर यह लोगों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की कीमत पर भी क्षेत्रीय हितों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है।या सोच हो सकती है कि निर्णय लेने वालों का ध्यान आकर्षित करने के लिए किसी विशेष क्षेत्र की समस्याओं को खाना तथा उस क्षेत्र की उचित मांगों को पूरा करने के लिए उन्हें बाध्य करना आवश्यक होता है। 
(ii) क्षेत्रवाद या उस क्षेत्र के राज्यों को विकसित करने की प्रक्रिया में उचित हिस्सा नहीं मिला हो। वे मांगे किसी क्षेत्र की लगातार अवहेलना पर भी आधारित हो सकती हैं। पिछले छः दशकों के योजनाबद्ध विकास के बावजूद देश के सभी क्षेत्रों का वांछित ढंग से विकास नहीं हो पाया है। अन्य कारणों के साथ-साथ वांछित सामाजिक आर्थिक विकास नहीं होने से भी अलग राज्य के गठन के लिए मांगे होने लगती हैं। लेकिन कई बार क्षेत्रवाद राष्ट्रीय हितों की अवहेलना करता है तथा लोगों में दूसरे क्षेत्रों के हितों के विरुद्ध नकारात्मक भावना को प्रोत्साहित करता है। ऐसी स्थिति में क्षेत्रवाद हानिकारक होता है। अनेक अवसरों पर क्षेत्रीय विरोध तथा प्रदर्शन राजनीतिक सोच पर आधारित होते हैं।

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